Friday, 6 May 2011

कुछ मीठे गुनाह..!

कुछ मीठे गुनाह
कुछ सीधे से झूठ 
कुछ मासूम शैतानियाँ 
कुछ खूबसूरत सी टूट फूट 

मन को भा जाए
जीना कुछ आसाँ कर जाए
थोडा सा तुम्हे हँसाए
खुशी से छलछलाता 
थोड़ा सा गुनगुनाता
वो इक कतरा आँसू का
तेरी आँखों में दे जाए 

तो क्यूँ ना तू उसे अपनाए
वो गुनाह , वो झूठ
वो शैतानियाँ , वो टूट फूट
बटोर ले तू थाम ले
समेट ले संजो ले
देखो कहीं जाने न पाए

क्या फ़र्क पड़ता है तुझे
जो वो कहें " बुरे हैं ये"
तेरे लिए तो  हर अच्छी बात
से थोड़े ज़्यादा खरे हैं ये
ये मीठे गुनाह
ये सीधे से झूठ
ये मासूम शैतानियाँ
ये खूबसूरत सी टूट फूट !!