वो ज़्यादा यूँ मनाना
वो कुछ अच्छा बहाना
वो प्यारा सा तराना
छलावा छल ही जाता है !
दिखावा चुभ भी जाता है!!
पता है मन के कोने को
कुछ पलों का फ़साना है
पता उल्लसित से लम्हों को
बुना सा ताना बाना है
फिर भी न जाने क्यूँ
छलावा छल ही जाता है!
दिखावा चुभ भी जाता है!!
गलों का हर बार मिलना
थामना यूँ हथेली को
साथ ज्यों उम्र भर का पाना है
जो कुछ भी अच्छा कहा'
मानो सच ही माना है
पता हमको भी तुमको भी
दो दिन का शामियाना है
छलावा छल ही जाता है!
दिखावा चुभ भी जाता है!!
